शनिवार, 10 अक्टूबर 2009
सेना मांगे ए के 47
भारतीय तकनीक से बनी पहली मेड इन इंडिया इन्सास राइफलें । भारतीय सेना को अब अपने इन रायफलों पर भरोसा नहीं है । उन्हें insas से ज्यादा भरोसा है ak 47 पर...जम्मू कश्मीर का इलाका हो या फिर नार्थ इस्ट का ...सेना को अब अपने इन्सास से भरोसा उठ गया है , उसे डर है कि कहीं ये इन्सास ऐन वक्त पर धोखा न दे दे । सेना का कहना है कि इन्सास रायफलों की लम्बाई ज्यादा है और आंतकवादियों के खिलाफ आपेरशन के दौरान इन्हें संभालने में बेहद दिक्कत आ रही है....दूसरी सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि महज कुछ ही फायरिंग के बाद ये रायफलें बेहद गर्म हो जाती है जिससे फायर को कुछ देर के लिए रोकना पड़ता है । ये रायफलें ए के 47 की तरह तेज फायर भी नहीं करती है...इन्सास से सिर्फ ब्रस्ट फायर होता है जिससे एक बार में तीन गोलियों को फायर किया जाता है , जबकि ए के 47 काफी तेजी से फायरिंग करती है.....जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के पास ए के 47 रायफलें हैं और सेना को इन्सास से जवाब देने में बेहद मुश्किल आ रही है.....इन्सास रायफलों को लेकर सेना के कई जवानों का कहना है कि इन्सास की फायरिंग से आंतकवादियों को गंभीर चोट नहीं आती है वो महज घायल होते हैं और कई बार घायल होने के बावजूद वो अपनी पोजिशन बदल कर सेना पर फायरिंग करते हैं या फिर उस जगह से भाग जाते हैं । ए के 47 रायफल इसके मुकाबले ज्यादा कारगर है । ये हाल सिर्फ अब इन्सास का नहीं है , सेना के पास मौजूद ग्रनेड भी अब ज्यादा कारगर नहीं हो रहे हैं। कश्मीर में आपरेशन के दौरान तीन में से महज एक ही ग्रनेड ब्लास्ट कर रहे हैं। इसकी वजह ये है कि ज्यादातर ग्रनेड 50 साल से भी पुराने वक्त के हैं और इनके फायर पार्ट में कई तरह की तकनीकि कमियां सामने आ रही है।
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